छत्तीसगढ़ : कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से पूछे 26 सवाल, जानिए इसके बारें में !

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प्रधानमंत्री के दौरे पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रधानमंत्री से 26 सवालों के जवाब की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता शैलेश नितीन त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री के पास पूर्ण बहुमत होने के बाद भी ऐजेंडा-2014 और पुरानी घोषणाओं को लागू करने से कौन रोक रहा है?

त्रिवेदी ने जानकारी दी कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी से जारी सूची में प्रधानमंत्री से 15-15 लाख रुपये देशवासियों के खातों में कब आएंगे?, फसल के लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत मुनाफा कब से देंगे? इसमें कोई उन्हें कैसे रोक सकता है। चार साल बीत गए, अगला चुनाव सामने है। 100 स्मार्ट सिटी कब तक बन पाएगी? आज तक तो एक पर भी काम शुरू नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि 100 दिन में जो 80 लाख करोड़ विदेशों में जमा कालाधन वापस आने वाला था, उसका क्या हुआ और कब तक लेकर आएंगे? 80 लाख करोड़ कालाधन तो आया नहीं, उल्टा आपने देश का हजारों करोड़ रुपया 60 हजार करोड़ बैंक घोटालों के माध्यम से और लाखों करोड़ रुपया वैसे देश के बाहर चला गया, उसके लिए कौन जिम्मेवार है? मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बाहर गया पैसा कब तक वापस आएगा? ललित मोदी, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी को कब वापस लाया जाएगा?

उन्होंने कहा कि एसएससी लीक घोटाले और सीबीएसई पेपर के लीक होने की रोकथाम के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए?, बगैर सुरक्षा नियमों को पूरा किए और बगैर डिफेंस प्रिक्योरमेंट प्रोसिजर की अनुपालना किए हजारों करोड़ के राफेल जहाज क्यों खरीद लाए?, पाकिस्तान को 56 इंच का सीना कब दिखाएंगे?, चीन से लाल आंख दिखाकर बात कब करेंगे?, पूरे देश का अनुसूचित जाति आंदोलित है या नहीं?, किसान अपनी उपज की सही कीमत में खरीद के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है या नहीं?

त्रिवेदी ने कहा कि 2 करोड़ युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगा स्टॉफ सलेक्शन कमिशन का पेपर लाखों रुपए में बिक रहा है या नहीं? इस देश के विद्यार्थियों का भविष्य सीबीएसई पेपर लीक की वजह से उस पर ग्रहण लग गया है या नहीं? देश का नौजवान बेरोजगारी से दर-दर की ठोकरें खा रहा है या नहीं? छोटे लघु उद्योग, छोटा उद्यमी और दुकानदार आज सड़क पर धंधा मंदा और बंद होने की वजह से कंगाली के द्वार पर खड़ा है या नहीं? नोटबंदी, जीएसटी और गलत आर्थिक नीतियों के परिणाम स्वरूप नौकरियां कम हो रही है।

उन्होंने कहा कि क्या इस देश का आम जनमानस उत्पीड़ित और आंदोलित है या नहीं? सरकार शासन की जिम्मेवारी छोड़ उपवास पर बैठ जाए तो सरकार कौन चलाएगा?

त्रिवेदी ने कहा कि भाजपा अगर परिवारवाद व वंशवाद के खिलाफ है तो कवर्धा संसदीय क्षेत्र जो राजनांदगांव का हिस्सा है, क्या यह परिवारवाद नहीं है?, धमतरी की सभा में नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के समय कहा था कि हम जीरम की जांच कराएंगे और जीरम के गुनहगारों को सजा देंगे। विधानसभा से सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के बावजूद नरेंद्र मोदी की सरकार ने क्यों सीबीआई जांच नहीं कराई?, एनआईए की जांच की दिशा नरेंद्र मोदी की सरकार बनते ही क्यों बदल गई?

उन्होंने कहा कि षड्यंत्रकारियों को गिरफ्तार करना तो दूर की बात उन को छूने की कोशिश भी क्यों बंद हो गई? झीरम के गुनहगार कहकर आत्मसमर्पित नक्सलियों की बारात में पुलिस के आला अधिकारी नाचते हुए क्यों नजर आए? वहीं पुलिस मीना खल्को, मड़कम हिड़में, सारकेगुड़ा, पेद्दागेलूर के मामलों में मूर्ति बनी क्यों दिखती है?

शैलेश ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर के बनाए हुए संविधान के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है? सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का नाम लेकर अनुसूचित जाति जनजाति समाज के कमजोर वर्गों को असुरक्षित बनाने की साजिश रची जा रही है? महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा क्यों बढ़ रही है? और बलात्कारियों और हत्यारों को बचाने में सरकारें क्यों लगी हुई हैं?

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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