छत्तीसगढ़ : अजीत जोगी मेदांता से डिस्चार्ज, जानिए पूरा मामला !

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। जोगी अब इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर में व्यायाम और आराम करेंगे। यह जानकारी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रवक्ता सुब्रत डे ने दी है। उन्होंने कहा कि 14 दिनों के सफलतातापूर्वक उपचार के बाद जोगी अब पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं।

जोगी परिवार ने मेदांता अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों सहित छत्तीसगढ़ के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने जोगी के स्वास्थय लाभ के लिए दुआ की। डे ने कहा कि जोगी अब नई दिल्ली स्थित इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर (वसंत कुंज) में दो सप्ताह रहकर व्यायाम, योग, तैराकी, साइकलिंग, वेट लिफ्टिंग, टेबल टेनिस, फिजियोथेरपी के साथ-साथ आराम भी करेंगे। इसके पहले भी जोगी 2004 में यहां रहकर स्वास्थ-लाभ ले चुके हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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