छत्तीसगढ़ : विधानसभा में हंगामा, 26 विधायक निलंबित

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को विपक्ष के 26 विधायक हंगामा करते हुए आसंदी के पास जुट गए। अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने इन विधायकों को निलंबित कर दिया।

सदन में शून्यकाल के दौरान सुपेबेड़ा में किडनी संबंधी बीमारियों से ग्रामीणों की मौत का मामला उठा। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने इस मामले को उठाते हुए मौतों की संख्या 107 बताई। वहीं कांग्रेस विधायक भूपेश बघेल ने कहा, “मैंने स्वयं सुपेबेड़ा का निरीक्षण किया है। वहां पर किडनी की बीमारी से 170 ग्रामीणों की मौत हुई है, लेकिन सरकार अपनी विफलता बचाने के लिए मृतकों की संख्या 65 बता रही है।” इसी मुद्दे पर शून्यकाल हंगामेदार रहा।

संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्षी सदस्यों की ओर से ग्रामीणों की मौत को लेकर बताए गए अलग-अलग आकंड़ों पर आपत्ति की। इसे लेकर विपक्षी सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष ने कहा कि यदि दो मौत भी होती है तो क्या ये सरकार के लिए चिंता का विषय नहीं है?

उधर स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर कहा कि ग्रामीणों के रक्त में यूरिया और क्रिएटिन की मात्रा अधिक पाई जा रही है। इसकी जांच की जा रही है। कुछ नल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई है। दंत चिकित्सक की भी ड्यूटी लगाई गई है।

स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर 2400 ग्रामीणों की जांच की गई है। जो इलाज के लिए सहमति दे रहे हैं, उनका चिरायु योजना के तहत इलाज किया जा रहा है। स्वाथ्य विभाग की टीम ने प्रभावित गांवों से जल और मिट्टी के नमूने लिए गए हैं।

मंत्री ने जानकारी दी कि गरियाबंद जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना की स्वीकृति दी गई है। साथ ही यहां करीब उप स्वास्थ्य केंद्र को हेल्थ और वेलनेस सेंटर की स्वीकृत दी गई है।

इस पर विधायक अरुण वोरा ने कहाए इस गांव में अब युवक-युवतियों का विवाह भी नहीं हो रहा है। इस बीमारी को राज्य आपदा घोषित किया जाए।

पूरे मामले में जब सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री अजय चंद्राकर जवाब देने खड़े हुए तो आसंदी ने इस पूरे मामले पर लगे स्थगन को अग्राह्य कर दिया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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