शतरंज : टाटा स्टील मास्टर्स में आनंद ने शियोंग को दी मात

0

पांच बार के विश्व विजेता विश्वनाथ आनंद ने शुक्रवार को टाटा स्टील्स मास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट में अमेरिका के जैफरी शियोंग को हरा अपनी पहली जीत दर्ज की। आनंद अपनी फॉर्म से संघर्ष कर रहे थे लेकिन उन्होंने शियोंग के खिलाफ दमदार वापसी की। यह जीत उन्हें एक हार और तीन ड्रॉ के बाद मिली है।

सफेद मोहरों से खेल रहे आनंद ने किंग साइड अटैक से शुरुआत की और मैच के बीच में इसका फायदा उन्हें बढ़त के तौर पर मिला। शियोंग ने उन्हें दूर रखने की कोशिश की लेकिन अंत में बाजी आनंद के हाथ ही लगी। इस जीत से मिले 2.5 अंकों से आनंद छठे स्थान पर पहुंच गए हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleटीम इंडिया में ऋषभ पंत ने नहीं बल्कि इस खिलाड़ी ने कर दी धोनी की भरपाई
Next articleजीएसटी में कटौती को लेकर ये बोल गए राजीव बजाज
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here