चेन्नेई-शी आन और शी आन-मुंबई एयर कार्गो लाइन खुली

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दक्षिण भारत के चेन्नेई और पश्चिमी चीन के शैनशी प्रांत की राजधानी शी आन के बीच और शी आन तथा मुंबई के बीच एयर कार्गो लाइन 7 दिसंबर को खुल गई। चेन्नेई से शाम 6 बजे उड़ान भरने वाला सछ्वांग एयरलाइंज कंपनी का ऑल कार्गो विमान शी आन श्यान यांग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा। रात में 11 बजकर 5 मिनट पर मोबाइल फोन के पुर्जे, सौर ऊर्जा पैड और रासायनिक उत्पादों से भरा 3 यू 8385 फ्लाइट का कार्गो विमान शी आन से मुंबई उड़ गया। वर्तमान में एक हफ्ते में दो फ्लाइट्स हैं और ए 330-200 एफ आल कार्गो विमान का प्रयोग होता है।

चेन्नई और मुंबई भारत के महत्वपूर्ण औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्र हैं। इन कार्गो एयरलाइन सेवाओं के खुलने से पश्चिमी चीन और दक्षिण एशिया के बीच व्यापार को बड़ी सुविधा मिलेगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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