चेल्सी छोड़ सकते हैं डिफेंडर क्रिस्टेंसन

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चेल्सी के नए कोच मॉरिजीया सारी के मार्गदर्शन में कम मैच खेलने से नाराज युवा डिफेंडर आंद्रेस क्रिस्टेंसन टीम छोड़कर जा सकते हैं। पिछले सीजन इटली के एंटोनिया कॉन्टे के मागदर्शन में क्रिस्टेंसन को बहुत मौके मिले थे लेकिन इस सीजन अब तक सारी ने डाविड लुईज पर अधिक भरोसा दिखाया है।

‘ईएसपीएन’ ने डेनमार्क के क्रिस्टेंसन के हवाले से बताया, “इस सीजन की शुरुआत मेरे लिए मुश्किल रही है। मैं अब और धैर्य नहीं रख सकता क्योंकि मैं 22 वर्ष का हूं और मुझे खेलना है। पिछले तीन सीजन मैं जिस टीम में रहा, मैंने उसके लिए लगातार मैच खेले हैं और जाहिर है कि अगर मुझे मौके नहीं मिले तो मैं ज्यादा दिन क्लब से जुड़ा नहीं रहूंगा।”

क्रिस्टेंसन ने कहा, “यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि मैं क्लब छोडूंगा या नहीं लेकिन अभी हालात मेरे अनुकूल नहीं हैं। यह एक महान टीम है और शुरुआती 11 में जगह बनाना मेरे लिए मुश्किल रहा है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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