केन्द्रीय गृह मंत्रालय की मीडिया टीम में हुआ बदलाव

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केंद्रीय गृह मंत्रालय की मीडिया टीम पूरी तरह बदल दी गई है। अब भारतीय सूचना के वरिष्ठ अधिकारी नितिन डी. वाकणकर को नेतृत्व सौंपा गया है, और उनके अधीन एक नई टीम नियुक्त कर दी गई है। वाकणकर ने वसुधा गुप्ता की जगह ली है। बसुधा को जांच इकाई में महानिदेशक बनाया गया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, वाकणकर महानिदेशक स्तर के अधिकारी हैं, और उन्हें पीआईबी के ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशंस’ से गृह मंत्रालय भेजा गया है।

वाकणकर, 1989 बैच के आईआईएस अधिकारी हैं। वह पहले सीबीआई के प्रवक्ता रह चुके हैं। वह रक्षा मंत्रालय के भी प्रवक्ता रह चुके हैं और अपने करियर के दौरान उन्होंने मुंबई क्षेत्र में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, सूचना सेवा के अन्य अधिकारी राजकुमार को गृह मंत्रालय की मीडिया विंग में अतिरिक्त महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। उप निदेशक प्रवीण कवि को भी गृह मंत्रालय की मीडिया विंग में नियुक्त किया गया है। वह पहले भी इस मंत्रालय में सेवा दे चुके हैं। सहायक निदेशक अमनदीप यादव को भी मंत्रालय की मीडिया विंग में नियुक्त किया गया है।

नयूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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