पेट्रोल-डीजल के दामों पर नियंत्रण की चुनौती, जानिए इसके बारे में !

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पेट्रोल डीजल की कीमतें नई ऊंचाई पर और डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर होने से आर्थिक स्तर पर आम भारतीयों का दमखम सांसें भरने लगा है। लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। भले ही हम जितनी भी ऊंची डींगें मारते फिरें कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो रहा है, लेकिन यकीन कौन करेगा? जो लोग भुगत रहे हैं, वे ऐसे बयानों पर हंसें या रोएं?

8.2 फीसदी की जीडीपी के बीच आम लोगों से जुड़ी अर्थव्यवस्था की ये स्थितियां सरकार के सामने चुनौती पेश कर रही हैं, लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग सरकार की नीति व नीयत पर सवाल खड़े कर रही है।

सही है कि रुपये के मूल्य में गिरावट और मजबूती का सीधा असर हमारी जिंदगी पर पड़ता है। कमजोर रुपया आमतौर पर पेट्रोल-डीजल की महंगाई के अलावा कई अन्य मदों में हमारी जेब पर बुरा असर डालता है। हालांकि, कुछ लोगों को इसका फायदा भी मिलता है। हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमत साल 2014 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की थाली पर पड़ता है। गरीबों के साथ यह क्रूर मजाक है।

महंगाई बढ़ने का कारण बनता है पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी होना। इससे मध्यम एवं निम्न वर्ग के लोगों की हालत तबाही जैसी हो जाती है, वे अपनी परेशानी का दुखड़ा किसके सामने रोएं? बार-बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाना सरकार की नीयत में खोट को ही दर्शाता है। इस तरह की नीति बिल्कुल गलत है, शुद्ध बेईमानी है। इस तरह की नीतियों से जनता का भरोसा टूटता है और यह भरोसा टूटना सरकार की विफलता को जाहिर करता है।

जिसके पास सब कुछ है, वह स्वयंभू नेता और जिसके पास कुछ नहीं वह निरीह जनता। इसी परिभाषा ने नेताओं के चरित्र को धुंधला दिया है। तेल की कीमत बढ़ाने का फैसला सरकार भले अंतर्राष्ट्रीय स्थितियों के कारण ले रही हो या सरकार का यह दावा कि इससे मिलने वाले राजस्व का उपयोग गरीबों के लिए आवासए शौचालय बनाने और बिजली पहुंचाने पर खर्च किया जाता है। इस तरह के तर्क लोगों के गले नहीं उतरते, क्योंकि पहले ही सरकार ने अलग-अलग मदों में कई तरह के उपकर लगा रखे हैं।

नोटबंदी व जीएसटी के घाव अभी भरे ही नहीं कि ऊपर से इस तरह पेट्रोल-डीजल की बेलगाम होती दरें सरकार की तानाशाही को दर्शाती है। देश में ऐसे कितने लोग हैं जो कारों एवं मोटरसाइकिलों पर चलते हैं? क्या पेट्रोल-डीजल का उपयोग गरीब लोग नहीं करते? क्या गरीबों के नाम पर गरीबी का मजाक नहीं उड़ाया जा रहा है? क्या इसका असर किसानों, मजदूरों, गरीबों और मेहनतकशों पर नहीं पड़ेगा?

आम जनता पर जबरन लादा जा रहा है इस तरह का भार। अतार्किक ढंग से गलत निर्णयों एवं नीतियों को जायज ठहराने की कोशिशों से सरकार की छवि खराब ही होती है। आखिर दाम बढ़ाने एवं करों के निर्धारण में कोई व्यावहारिक तर्क तो होना चाहिए, क्योंकि जहां तक रुपये की गिरती कीमत को थामे रखने का सवाल है तो यह मोदी सरकार के लिए कोई असंभव कार्य नहीं है। इन विकराल होती स्थितियों में सरकार को ही कोई कठोर कदम उठाने होंगे। ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सके।

इस मामले में कुछ दक्षिण एशियाई देशों का उदाहरण हमारे सामने हैं। जहां पेट्रोल-डीजल के दाम एक सुनिश्चित दायरे में रहते हैं, भले ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसके भाव ऊपर-नीचे होते रहें एवं मुद्रा विनिमय की स्थितियों में भी उतार-चढ़ाव चलता रहे। वहां की सरकारें पेट्रोल-डीजल के दामों को बांधे रखती हैं।

इस प्रक्रिया से भले ही सरकार की राजस्व धनराशि घटती-बढ़ती रहे, लेकिन आम जनजीवन इनसे अप्रभावित रहता है। भारत में भी ऐसी ही स्थितियों को लागू करने की जरूरत है, ताकि आमजन एवं उपभोक्ताओं को मुसीबत के कहर से बचाया जा सके। महंगाई की मार से बचाने का उपाय सरकार को ही करना होगा और वही सरकार सफल है जो इन आपाद स्थितियों से जनजीवन को प्रभावित नहीं होने देती।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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