‘चक दे इंडिया’ ने पूरे किए 13 साल

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शाहरुख खान अभिनीत फिल्म ‘चक दे! इंडिया’ आज से 13 साल पहले इसी दिन रिलीज हुई थी। इस मौके पर फिल्म के लेखक जयदीप साहनी ने इसकी स्क्रिप्ट को लिखने के पीछे अपने मकसद का खुलासा किया है। जयदीप ने कहा, “मैं काफी दिनों से इस कहानी को बताना चाहता था इसलिए बंटी और बबली के बाद जब आदि (आदित्य चोपड़ा) ने मुझसे पूछा कि मैं अब आगे क्या करना चाहता हूं तब मैंने उन्हें बताया कि मैं इस फिल्म को करना चाहता हूं, जो महिला एथलीटों की दुनिया और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक सेतु का काम कर सकती है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने इसे लेकर जो कुछ सोचा और महसूस किया उस बारे में उन्हें बताया, उन्होंने माना कि यह शर्म की बात है कि अधिकतर लोग इस दुनिया के बारे में जानते ही नहीं है और यह भी माना कि अगर हम सबकुछ सही से करते हैं तो यह एक अच्छी फिल्म बन सकती है।”

जयदीप को इस बात की खुशी है कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा में एक मील का पत्थर साबित हुई है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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