लाइसेंसिंग लागत में बढ़ोतरी पर सीईआरएन ने माइक्रोसॉफ्ट को छोड़ा

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मशहूर वैज्ञानिक प्रयोगशाला सीईआरएन, जहां वेब का जन्म हुआ, उसने माइक्रोसॉफ्ट को लाइसेंसिंग लागत में बढ़ोतरी के कारण छोड़ दिया है। इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट ने सीईआरएन के शैक्षणिक स्थिति को बदल दिया था, जिससे लागत में दस गुना की बढ़ोतरी हो गई थी।

हाल ही में सीईआरएन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा था कि सीईआरएन ने पिछले 20 वर्षों से माइक्रोसॉफ्ट के उत्पादों के उपयोग के लिए ‘शैक्षणिक संस्थान’ के रूप में अपनी स्थिति के आधार पर विशेष परिस्थितियों का आनंद लिया है। हालांकि सीईआरएन के प्रोफाइल में पिछले दस वर्षों में बदलाव आया है।

बहुवर्षीय परियोजना इस गर्मी में आईटी विभाग और स्वयंसेवकों के लिए एक पायलट मेल सेवा के साथ शुरू होगी।

अगर यह अच्छी तरह से चलता है तो सीईआरएन अपने कर्मचारियों को नई मेल सेवा पर स्थानांतरित करेगी। साथ ही कई और उत्पादों और सेवाओं पर भी काम चल रहा है। आईटी कोर सेवाओं, प्रोटोटाइप्स और पायलट्स के लिए वैकल्पिक सॉफ्टवेयर पैकेजों का मूल्यांकन का काम जारी है, जिसे अगले कुछ सालों में जरूरत के हिसाब से अपना लिया जाएगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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