काला धन मामले में केंद्र की याचिका पर सुनवाई होगी आज

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केंद्र ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया, जिसमें उच्च न्यायालय ने कहा था कि कालाधन कानून को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। यानी इसे एक अप्रैल, 2016 से पहले लागू नहीं किया जा सकता, जिस दिन यह कानून संसद में पारित हुआ था।

न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और संजीव खन्ना की अवकाश पीठ के समक्ष मामले को पेश करते हुए महाधिवक्ता तुषार मेहता ने कहा कि उच्च न्ययालय के आदेश से न्यायालयों के समक्ष लंबित कई मामलों पर असर पड़ेगा। अदालत मंगलवार को मामले की सुनवाई करेगी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 16 मई को एक आदेश पारित किया था, जिसके अंतर्गत सरकार और आयकर विभाग पर काला धन(अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) काराधान अधिनियम के तहत वकील गौतम खेतान के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया गया था।

खेतान वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदा घोटाले में एक आरोपी हैं और उन्हें 26 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था।

खेतान ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए कहा था कि केंद्र की अधिसूचना अवैध है, जिसमें कहा गया है कि अधिनियम एक अप्रैल, 2016 (जब यह पारित हुआ) के बदले एक जुलाई, 2015 से प्रभावी माना जाएगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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