लॉकडाउन में सैलरी पर SC में बोला केंद्र, यह कंपनी और कर्मचारियों का मसला….

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देश में कोरना वायरस से निपटने के लिए 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है। इस बीच 29 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर कहा कि लॉकडाउन के बीच कंपनियां अपने कर्मचारियों को पूरी सैलरी दें। अगर कंपनियों ने ऐसा नहीं किया तो नके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस आदेश पर एक याचिका की सुनवाई करते हुए रोक लगाई थी।

अब निजी कंपनियों के कर्मचारियों को पूरी सैलरी देने की मांग पर मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अलग रास्ता चुना है। सरकार ने कहा है कि ये कंपनियों और कर्मचारियों के बीच का मामला है। सरकार ने ये भी कहा कि हम इस मसले में दखल नहीं दे सकते हैं।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार कंपनियों से कितने दिन लगातार बिना काम के पूरी सैलरी देने की संभावना रखेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने गृह मंत्रालय के उस आदेश पर रोक लगा दी थी जिसमें लॉकडाउन के बीच कर्मचारियों को पूरी सैलरी देने की बात कही गई थी। लेकिन अब जस्टिस अशोश भूषण की बेंच ने कहा है कि लॉकडाउऩ के दौरान की सैलरी के भुगतान को लेकर कंपनियों और कर्मचारियों के बीच कोई सहमति बननी चाहिए।

लॉकडाउन की मियाद के दौरान सैलरी के भुगतान को लेकर कंपनियों को आदेश देने वाली याचिकाओं पर सुनावाई के दौरान अदालत ने ये टिप्पणी की है।

बता दें कि कोरोना वायरस संकट और लॉकडाउन का उद्योग धंधों और कारोबारी सेक्टर पर असर पड़ा है। कारोबार की इस बीच रफ्तार पर ब्रेक लगे रहे थे।

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