केंद्र सरकार इलाहाबाद बैंक में डालेगी 3,054 करोड़ रुपये

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सरकारी बैंक इलाहाबाद बैंक ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सराकर चालू वित्तवर्ष में बैंक में 3,054 करोड़ रुपये की पूंजी डालेगी। बयान में कहा गया, “सरकार ने बैंक को सूचना दी है कि वह वित्त वर्ष 2018-19 में बैंक 3,054 करोड़ रुपये की पूंजी इक्विटी शेयरों (विशेष सिक्युरिटी/बांड्स) के तरजीही आवंटन के बदले निवेश के रूप में डालेगी।”

चालू वित्तवर्ष की तीसरी तिमाही के अंत में इलाहाबाद बैंक की पूंजी पर्याप्तता अनुपात बासेल-3 नियमन के मुताबिक 6.88 फीसदी रह गई थी, और इस बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 71.81 फीसदी थी।

बैंक चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में 1,944.37 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया है, जबकि पिछले वित्तवर्ष की समान तिमाही में बैंक को 28.84 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोलकाता स्थित मुख्यालय वाले इस बैंक पर इस साल मई में शीघ्र सुधार कार्रवाई (पीसीए) फ्रेमवर्क के तहत अतिरिक्त पाबंदी लगाई थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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