ऋण पुनर्गठन के लिए केंद्र आरबीआई से बात कर रहा : निर्मला सीतारमण

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अर्थव्यवस्था गंभीर सुस्ती से गुजर रही है, और इसका व्यापार पर और भी असर पड़ सकता है। ऐसे में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि सरकार का फोकस अब ऋण पुनर्गठन पर है और इस पर भारतीय रिजर्व बैंक के साथ बातचीत चल रही है।

सीतारमण ने फिक्की के एक वेबिनार में कहा, “फोकस पुनर्गठन पर है। वित्त मंत्रालय इस पर आरबीआई के साथ सक्रियता के साथ बातचीत कर रहा है। सैद्धांतिक रूप में पुनर्गठन के विचार को अच्छी तरह लिया गया है।”

कई औद्योगिक खिलाड़ियों और संस्थाओं ने कोविड-19 महामारी के कारण आई आर्थिक सुस्ती और कंपनियों के बकाये का भुगतान करने की स्थिति में न होने के मद्देनजर एक बार के ऋण पुनर्गठन की मांग की है।

वित्तमंत्री ने कहा कि मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया हर कदम हितधारकों और उद्योग विशेषज्ञों के साथ गहन परामर्श के बाद ही उठाया गया है।

उन्होंने हॉस्पिटलिटी सेक्टर के लिए मोरैटोरियम विस्तार या एक पुनर्गठन की जरूरत बताई और कहा कि सरकार इस मोर्चे पर आरबीआई के साथ काम कर रही है।

सीतारमण ने कहा, “मैं हास्पिटलिटी सेक्टर के लिए मोरैटोरियम के विस्तार या पुनर्गठन की जरूरतों को पूरी तरह समझती हूं। हम इस पर आरबीआई के साथ काम कर रहे हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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