सीसीआई ने दी जीएमआर एयरपोर्ट की हिस्सेदारी फ्रांस की कंपनी को बेचने की मंजूरी

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भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने जीएमआर एयरपोर्ट में 49 फीसदी हिस्सेदारी फ्रांस की ग्रुप एडीपी को ग्रीन चैनल मेकेनिज्म के जरिए बेचने को मंजूरी दे दी है। ग्रीन चैनल एक ऑटोमेटिक मंजूरी प्रदान करने की प्रणाली है जिसमें माना जाता है कि सीसीआई ने मंजूरी संबद्ध पक्षकरों द्वारा संयुक्त सूचना प्राप्त करने पर मंजूरी दे दी है।

एक आधारिक बयान के अनुसार, सीसीआई ने एट्रोपोस द पेरिस एसए (एडीपी) द्वारा जीएमआर एयरपोर्ट्स लिमिटेड (जीएएल) और जीएमआर इन्फ्रा सर्विसेज लिमिटेड (जीआईएसएल) की इक्विटी शेयर पूंजी द्वारा अधिग्रहण संयुक्त ग्रीन चैनल प्राप्त की।

जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्टर लिमिटेड (जीआईएल) ने गुरुवार की शाम एलान किया कि उसने अपने एयरपोर्ट्स की शाखा में 79 फीसदी हिस्सेदारी ग्रुप एडीपी के साथ रणनीतिक साझेदारी की है।

न्यूज स्त्राते आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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