सीबीआई प्रमुख ने पदक विजेता हर्षिता को सम्मानित किया

0
62

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक अलोक कुमार वर्मा ने जकार्ता एशियाई खेलों के सेलिंग में कांस्य पदक जीतने वाली हर्षिता तोमर को गुरुवार को सम्मानित किया। हर्षिता की मां रानी तोमर सीबीआई अधिकारी हैं।

16 साल की हर्षिता ने 18वें एशियाई खेलों के सेलिंग में लासेर 4.7 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। हर्षिता ने इस स्पर्धा में कुल 62 अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया था।

हर्षिता इससे पहले राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिताओं में 19 स्वर्ण, तीन रजत और पांच कांस्य पदक जीत चुकी हैं।

सीबीआई निदेशक ने इतने कम उम्र में इन उपलब्धियों के लिए हर्षिता की तारीफ की।

उन्होंने सीबीआई परिवार की तरफ से हर्षिता और उनके परिवार को शुभकामनाएं दीं और उन्हें भविष्य में सीबीआई की तरफ से हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleफरहान के बाद एक बार फिर से श्रद्दा आई रिलेशन में, इस शख्स को दे बैठी दिल
Next articleबिहार के कई हिस्सों में हल्की बदली छाई
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here