सीबीएफसी ने बाल तस्करी पर बनी फिल्म को नहीं दिया प्रमाण पत्र

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राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार सचिन गुप्ता द्वारा बाल तस्करी पर बनी फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है। सीबीएफसी के एक अधिकारी का कहना है कि इस फिल्म का विषय बेहद असभ्य है। ‘पाखी’ नाम से बनीं फिल्म को शुक्रवार को रिलीज किया जाना था।

गुप्ता ने आईएएनएस से कहा, “हमने रिवाइजिंग कमेटी के लिए अपील की है, लेकिन जिस प्रकार का कारण सीबीएफसी ने दिया है, वह बेहद अजीब है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की फिल्में नहीं रिलीज होनी चाहिए। आप इस प्रकार के बारे में कैसे सोच सकते हैं? मैं नहीं चाहता कि मेरी बेटी इस फिल्म को देखे। वह मेरी इस फिल्म को ‘ए’ प्रमाण पत्र दे सकते थे।”

निर्देशक गुप्ता ने कहा, “जिस प्रकार से उन्होंने मुझसे बात की, वह शर्मनाक था। निर्देशक से बात करने के लिए एक प्रोटोकॉल होना चाहिए। यह मेरी पहली फिल्म नहीं है।”

अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सवों में फिल्म को दर्शाने के लिए डिजिटल मंच के इस्तेमाल पर गुप्ता ने कहा, “डिजिटल क्यों? मैंने इसमें इतना पैसा खर्च किया है और इसके शोध के लिए आठ माह का समय भी। मैंने थियेटर के लिए यह फिल्म बनाई है। मैं एक फिल्मकार हूं। यह फिल्मोत्सवों के लिए नहीं है। मैं केवल चार या पांच लोगों के लिए फिल्म नहीं बनाना चाहता।”

गुप्ता ने कहा कि उन्होंने फिल्म थियेटरों की बुकिंग कर ली थी और पीवीआर उनकी फिल्म के रिलीज के लिए तैयार थे। उन्होंने कहा कि अगर सीबीएफसी ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’ जैसी फिल्मों को प्रमाण पत्र दे सकता है, तो बाल तस्करी पर बनी फिल्म को क्यों नहीं दे सकता?

निर्देशक का कहना है कि इस फिल्म में कुछ भी गलत नहीं है। इस फिल्म को बिना कोई शर्म महसूस किए एक परिवार भी बैठ कर देख सकता है।

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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