सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पद के लिए कैवनॉग की अग्निपरीक्षा 4 सितंबर से

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के लिए नामित न्यायाधीश ब्रेट कैवनॉग की सीनेट मंजूरी सुनवाई प्रक्रिया चार सितंबर से शुरू होगी। सीनेट न्यायपालिका समिति के अध्यक्ष चक ग्रास्ली ने इसकी घोषणा की।

आयोवा से रिपब्लिकन ग्रास्ली ने शुक्रवार को बयान में कहा, “उन्होंने दर्जनों सीनेटरों से मुलाकात की है, जिन्होंने उनके बारे में सकारात्मक चीजें कहीं।”

उन्होंने कहा, “मौजूदा हालात में हमारे पास राष्ट्रपति बुश और राष्ट्रीय अभिलेखों से प्राप्त अन्य रिकॉर्डो व बाकी ई-मेलों की समीक्षा के लिए बहुत वक्त है। अमेरिकी लोगों के लिए अब वक्त न्यायाधीश कैवनॉग से उनकी जन सुनवाईयों को सीधे सुनने का है।”

ग्रास्ली ने कहा उन्हें यह सुनवाई तीन से चार दिन चलने की उम्मीद है। ट्रंप ने न्यायमूर्ति एंथनी केनेडी की सेवानिवृत्त से खाली हुए पद को भरने के लिए कैवनॉग को पिछले महीने उच्च न्यायालय में नामांकित किया था। कैवनॉग को मंजूरी के लिए केवल 50 वोटों की जरूरत है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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