खुलासा / नोटबंदी के ढाई साल बाद 22% बढ़ी नकदी, 21 लाख करोड़ रु के नोट हैं चलन में

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जयपुर। साल 2016 और महीना नवंबर था और उस दिन 8 तारीख को 8:00 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टीवी पर आए और उन्होंने ऐलान कर दिया था कि उस वक्त पर चल रहे 500 और 1000 के नोट बंद हो गए हैं तब सरकार ने नोट बंदी के पीछे कई कारण घटनाएं थे और कहा था कि इससे भ्रष्टाचार कम होगा आतंकवाद कम होगा टैक्स में बढ़ोतरी होगी इसके अलावा कहीं कानून करते थे और इसके अलावा अर्थव्यवस्था में पैसे की बड़ी सरकुलेशन को लेकर भी कई बातें कही गई थी वहीं अब इस सरकार की नोटबंदी के पीछे की विफलता है धीरे-धीरे सामने आ रही है.

आपको बता दें कि सरकार यह भी कहने लगी थी कि नोटबंदी से डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिलेगा और डिजिटल पेमेंट ज्यादा होगा लेकिन अब ऐसा कुछ होते हुए सामने नहीं आ रहा है क्योंकि राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में दी गई जानकारी में कुछ अलग ही तस्वीर देखने को मिली है जिसमें यह बताया गया कि नोटबंदी के महज ढाई साल बाद ही नगदी कम होने की वजह करीब 22 फीसद तक बढ़ चुकी है.

आपको बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा राज्यसभा में बताई गई मई के अंत में 21 लाख 71हजार 385 करोड़  के नोट चलन में थे यानी यह नोट बंदी से पहले की तुलना में करीब 22% तक अधिक है.

वहीं आपको बता दें कि नवंबर 2016 में 500 और 1000 के पुराने नोटों पर प्रतिबंध लगाने के बाद जनवरी 2017 में नकदी में लगभग करीब 900000 करोड रुपए की गिरावट देखी गई थी वहीं इसके बाद से ही वित्तीय प्रणाली में नगद राशि लगातार बढ़ रही है भले ही सरकार और आरबीआई ने कम नदी भुगतान करण और विभिन्न लेन-देन में नगदी के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने जैसी कई कोशिशों करी हो.

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