53 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के लिए गिन्नी गोल्ड के खिलाफ मामला दर्ज

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को कहा कि उसने दिल्ली की एक कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 53 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के लिए एक मामला दर्ज किया है। यह कंपनी सोने और हीरे के जेवरात बनाती है। सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि एजेंसी ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक शिकायत पर गिन्नी गोल्ड प्रा. लिमिटेड और इसके पांच निदेशकों, गारंटर रही एक अन्य कंपनी एसकेजी डोर्स लिमिटेड और इसके दो निदेशकों, बैंक के पैनल पर रहे दो वकीलों और यूनियन बैंक के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है।

बैंक ने एफआईआर में आरोप लगाया है कि ऋण लेने वाली इस कंपनी ने नई दिल्ली के पटेल नगर स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शाखा से कैश क्रेडिट फैसिलिटी और बैंक गारंटी हासिल किया।

बैंक ने आरोप लगाया है कि गारंटर कंपनी ने उधारी लेने वाली कंपनी द्वारा हासिल की गई सुविधा के जमानत के रूप में बैंक के पक्ष में एक ऐसी संपत्ति को बंधक रखा, जो पहले ही बिक चुकी थी और उसका झूठा टाइटल डीड बैंक में जमा कर दिया।

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि गिन्नी गोल्ड प्रा. लिमिटेड ने ऋण का पुनर्भुगतान नहीं किया और उसे गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया, जिससे बैंक को 53 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

नयूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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