कार्बन डाईऑक्साइड प्रदुषण नहीं बल्कि ऊर्जा का करेगी उत्पादन

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जयपुर। तकनीक तरक्की के दौड़ में बहुत ही आगे बढ़ती जा रही है। इसी की दिशा में केंद्रीय फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के रसायन शास्त्र के प्रोफेसर फर्नांडो यूरिबे रोमो एक शोध में सफलता हासिल की है। आपको बता दे कि फर्नांडो कई सालों से सिंथेटिक पदार्थ के द्वारा कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण अभिक्रिया संपन्न करवाने के लिये शोध कर रहे थे। जिस तरह से पेड़ पौधे अपना भोजन सूर्य की रोशनी में कार्बन डाईऑक्साइड की उपस्थिति में बनाते हैं ठीक उसी तरह से ये डिवाइस फोटो सिंथेसिस की प्रक्रिया करती है।

आपको जानकारी दे दे कि यह पहली बार नहीं हुआ है कि जब कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया संपन्न की गई है। बता दे कि इसमें किफायती सिंथेटिक पदार्थ बनाने पर जोर दिया गया, जिससे की दैनिक जीवन में यह उपयोगी साबित हो सकती है। रोमो इसके बारे में जानकारी दे दे हुए कहते है कि यह युक्ति ग्रीनहाउस प्रभाव को कम करने संबंधी प्रयासों को नई दिशा देगी और इसी तरह से यह डिवाइस पराबैंगनी किरणों की उपस्थिति में आसानी से कार्य करती है

इसका कारण है कि अल्ट्रा वायलेट किरणों का ऊर्जा स्तर बहुत अधिक होता है। आपको बता दे कि कुछ बहुत ही दुर्लभ धातु होते हैं, जो कि विजिबल लाइट में अभिक्रिया करते हैं। जैसे कि प्लेटिनम, रेनियम, इरीडियम, आदि धातुएं है जो बहुत ही दुर्लभ और महंगे हैं। इसलिये फिर टाइटेनियम का उपयोग किया है जो कि सामान्य तौर पर उपलब्ध और नोन टॉक्सिक पदार्थ है। इसकी खास बात ये है कि इसमें एन एल्काइल-2 एमीनोटेरेफ्थालेट्स मिलाने पर यह प्रकाश को अवशोषित करने लग जाता है।

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