एसजी गेंद से खुश नहीं हैं कप्तान विराट कोहली

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विराट कोहली ने भारत में टेस्ट मैच में इस्तेमाल की जाने वाली एसजी गेंद की क्वालीटी पर निराशा जताई है और क्रिकेट में हर जगह ड्यूक गेंद के इस्तेमाल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि एसजी गेंद जल्दी घिस जाती है जिससे खिलाड़ी के प्रदर्शन पर प्रभाव पड़ता है।

एसजी गेंद भारत में टेस्ट मैच में इस्तेमाल की जाती है। वेस्टइंडीज के खिलाफ राजकोट में खेले गए पहले टेस्ट मैच के बाद भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी इस पर निराशा जताई थी।

वेबसाइट ईएसपीएनक्रिकइंफो ने कोहली के हवाले से लिखा है, “गेंद का पांच ओवर बाद घिस जाना हमने कभी नहीं देखा। पहले गेंद की जो क्वालीटी थी वो काफी अच्छी थी। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि इसमें गिरावट कैसे आई। ड्यूक गेंद की क्वालीटी अभी भी अच्छी है। कुकाबुरा की क्वालीटी भी अच्छी है। कुकाबुरा गेंद कैसी भी हो उसकी क्वालीटी में गिरावट नहीं आई।”

भारतीय कप्तान ने कहा, “मुझे लगता है कि ड्यूक टेस्ट मैचों के लिए सबसे सही गेंद है। अगर यह स्थिति रही थो मैं सभी जगह टेस्ट क्रिकेट में ड्यूक गेंद के इस्तेमाल का समर्थन करूंगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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