शारीरिक गतिविधियों में शामिल रहने से मिलती है खुशी, जानिए कैसे ?

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तेज चलना, बागवानी या भारोत्तोलन आपका वजन कम करने के अलावा आपको खुश भी रख सकते हैं। हालिया शोध में इसका खुलासा हुआ है कि आपकी शारीरिक गतिविधियों की निरंतरता और उन्हें करने की क्षमता आपकी खुशी के स्तर को बढ़ाती है।

शोधकर्ताओं के एक दल ने पाया कि एक सप्ताह में एक बार शारीरिक श्रम करने वाला एक सामान्य वजन का वयस्क बिना शारीरिक श्रम के पूरा सप्ताह गुजारने वाले समान वजन के वयस्क की अपेक्षा 1.4 गुना ज्यादा खुश रहा जबकि सामान्य से अधिक वजन का वयस्क 1.5 गुना ज्यादा खुश रहा।

शारीरिक श्रम से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है क्योंकि इससे मानसिक तनाव और घबराहट जैसी बीमारियां से परेशान लोगों को फायदा होता है।

मिशिगन विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर वेयन चेन ने कहा, “हमारे शोध के अनुसार शारीरिक श्रम की निरंतरता और उसकी मात्रा तथा खुशी के बीच सीधा संबंध है।”

हैप्पीनेस स्टडीज नामक जर्नल में उन्होंने कहा, “थोड़ा सा भी शारीरिक श्रम करने पर खुशी मिलती है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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