त्योहारी सीजन खरीदें सिर्फ प्रमाणित हीरा : आईजीआई

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देश में रत्न सत्यापन व मूल्यांकन की अग्रणी व स्वतंत्र वैश्विक संस्था इंटरनेशनल जेमोलोजिकल इंस्टीट्यूट (आईजीआई) ने इस त्योहारी सीजन में रत्नाभूषण खरीदने की योजना बना रहे लोगों से सिर्फ प्रमाणित हीरा ही खरीदने की अपील की है।

प्रमाणिक रत्नाभूषण की खरीदारी को लेकर आईजीआई ने धनतेरस से पहले एक महीने का जागरूकता अभियान ‘ऑन ए बिलियन ईयर ओल्ड डायमंड’ चलाया है। इस अभियान में आईजीआई के साथ देश के 24 शहरों के प्रमुख आभूषण विक्रेता शामिल हुए हैं। रत्नाभूषण खरीदारी का शुभ त्योहार धनतेरस पांच नवंबर को है।

आईजीआई के अनुसार, मूल्य के प्रति जागरूक भारतीय ग्राहकों और संगठित रत्नाभूषण विक्रेताओं के कारण हीरे के सत्यापन कारोबार में 25 फीसदी की वृद्धि हुई है।

आईजीआई-इंडिया के प्रबंध निदेशक तेहमास्प प्रिंटर ने कहा, “भारत में रत्न विज्ञान संबंधी जानकारी व विशेषज्ञता का प्रसार में हमारा लैब अव्वल है। हीरा, रत्न और आभूषण प्रमाणन में हम बाजार में अग्रणी हैं। हीरा और हीरे के आभूषण की खरीदारी में हम ग्राहकों के हितों की रक्षा करते हैं। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि आईजीआई से जो हीरा प्रमाणित है वह प्राकृतिक हीरा है और अरब वर्ष पुराना है।”

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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