बुंदेलखंड का ब्राह्मण समुदाय राजनीतिक उपेक्षा से आहत, जानिए इसके बारे में !

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मध्य प्रदेश के दतिया में आयोजित ब्राह्मण सम्मान समारोह में तमाम समाज के नेताओं ने राजनीतिक दलों द्वारा ब्राह्मणों की उपेक्षा पर रोष जाहिर किया। इतना ही नहीं, सभी ने एक स्वर में कहा कि ब्राह्मणों का नेतृत्व करने वालों ने भी समाज का आगे लाने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। बुंदेलखंड ब्राह्मण महासभा के तत्वावाान में गुरुवार को यहां आयोजित ब्राह्मण प्रतिभा सम्मान समारोह में जहां आíथक आाार पर आरक्षण की बात उठी, वहीं विभिन्न राजनीतिक दलों में ब्राह्मण समाज की उपेक्षा पर चिता व्यक्त करते हुए मुख्य अतिथि पूर्व विाायक हरिवल्लभ शुक्ला ने कहा कि ब्राह्मण समाज एक नहीं, एक के साथ 10 के सिद्धांत पर अडिग रहता है, इसलिए राजनीतिक दल ब्राह्मण को दीन-हीन कुलीन समझते हैं, उसकी प्रतिभा को पहचानने की भूल कर रहे हैं। ब्राह्मण समाज जहां भी बहुतायत में है, उसको सत्ता में भागीदारी मिलनी चाहिए।

समारोह के विशेष अतिथि और पूर्व प्रांतीय अयक्ष शिक्षक कांग्रेस एवं अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा में महामंत्री रामनरेश त्रिपाठी ने कहा कि ब्राह्मणों ने भय के साए में समझौता के तहत रावण को आदर्श नहीं माना, बल्कि चाणक्य के अस्तित्व को सदैव स्वीकार किया है।

कार्यक्रम के आयोजक सुनील तिवारी ने कहा कि जिले में 75000 से अािक ब्राह्मण मतदाता हैं, लिहाजा इस वर्ग की उपेक्षा किसी भी राजनीतिक दल को नहीं करना चाहिए। कुछ तथाकथित लोग ब्राह्मणों के नाम पर नेतागिरी तो करते हैं, मगर इस वर्ग का ख्याल नहीं रखते।

तिवारी ने कहा कि बाहरी लोग यहां आकर राजनीति कर रहे हैं, समाज में बंटवारा उनका मकसद है। आगामी चुनाव में समाज उसी का साथ देगा, जो स्थानीय है न कि अपनी राजनीतिक रेाटियां सेंकने आया है।

इस मौके पर राधावल्लभ सरवरिया ने कहा कि ब्राह्मण अपने हक की लड़ाई के लिए उठ खड़ा हुआ है। अगर उसकी उपेक्षा की गई तो वह सहन नहीं करेगा। कर्मचारी नेता मुन्नी लाल शर्मा ने भी ब्राह्मणों की राजनीतिक उपेक्षा पर रोष जाहिर किया। इस मौके पर समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित भी किया गया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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