बुंदेलखंड़ : आग से झुलसी बुजुर्ग महिला की मौत के बाद बेटी, बहू की मौत

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उत्तर प्रदेश में बांदा जिले के बबेरू कोतवाली क्षेत्र के परास गांव में मंगलवार को घर में आग लगने से जिंदा खाक हुई बुजुर्ग महिला को बचाने के दौरान झुलसी उसकी बेटी और बहू की बुधवार को मौत हो गयी है। बबेरू पुलिस उपाधीक्षक(सीओ) राजीव प्रताप सिंह ने गुरुवार को बताया, “परास गांव में मंगलवार की दोपहर खाना पकाते समय अचानक चूल्हे की चिंगारी से घर में लगी आग से झुलसकर बुजुर्ग महिला मुन्नी देवी (70) जिंदा खाक हो गयी थी, उसे बचाने में उसकी बेटी आरती(33) और बहू रेखा(35) बुरी तरह झुलस गई थीं।”

उन्होंने बताया कि आरती और रेखा को इलाज के लिए जिले की सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां बुधवार को इलाज के दौरान अस्पताल में पहले आरती की मौत हो गई, इसके कुछ घंटे बाद कानपुर ले जाते समय रास्ते में रेखा ने भी दम तोड़ दिया है।

उन्होंने बताया कि बुधवार को तीनों शवों का पोस्टमॉर्टम करवाया गया है और परिजनों को सौंप दिए गए हैं। पुलिस घटना की जांच में जुटी है।

वहींए बबेरू के उपजिलाधिकारी(एसडीएम) महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आर्थिक नुकसान का आंकलन करवा लिया गया है, जल्द ही पीड़ित परिवार को सरकारी मदद दिलाई जाएगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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