ब्रेन ट्रेमिक इंजरी को नही लें हल्के में बन सकता है कोमा में जाने का कारण

दिमाग हमारे शरीर का सारा कंट्रोल सिस्टम है । इसके वायर में हल्की सी खराबी भी हमारा सारा काम बिगाड़ कर रख देती है । यह जितना ज्यादा काम का अंग है उतना ही यह नाजुक भी है

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जयपुर।  दिमाग हमारे शरीर का सारा कंट्रोल सिस्टम है । इसके वायर में हल्की सी खराबी भी हमारा सारा काम बिगाड़ कर रख देती है । यह जितना ज्यादा काम का अंग है उतना ही यह नाजुक भी है । दिमाग में हुई इंजरी को हम बहुत ही हल्के में ले बैठते हैं । जो की हमारे लिए परेशानी की वजह बन जाता है ।

कई बार गिर जाने पर लगी सर की चोट हो या एक्सीडेंट में लगी चोट को हमहलके में ले जाते हैं इतना ही नही कभी कभी तो हम बहुत हल्का फुल्का इलाज़ ले कर ही दूर हो जाते हैं । जो की हमारे लिए बहुत ही घातक होता है । दिमाग में लगी चोट का पता बहुत जल्द और आसानी से नहीं चलता है । जैसे कई बार नाक से खून आने को हम समझ लेते हैं की नाक की नस फट गई है । जबकि यह दिमाग से जुड़ी परेशानी ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर परेशानी को भी दर्शाता है । इसलिए इनको  हल्के में लेंना आपको कोमा तक भी पहुंचा सकता है ।

क्या होते हैं ब्रेन ट्रेमिक इंजरी के लक्षण ?

  • इसमें कुछ सेकंड या मिनटों के लिए बेहोशी आ जाती है।सिरदर्द और उल्टियां होने लगती हैं
  • बोलने में दिक्कत होने लगती है चक्कर आने लगते हैं। शरीर पर कंट्रोल खत्म होने सा लगता है और बैलेंस बनाने में दिक्कत होती है।
  • आंखों से धुंधला दिखायी देने लगता है और कानों में हमेशा ऐसी आवाज आती है जैसे कुछ बज रहा हो।
  • मुंह का स्वाद बदल जाता है और लाइट का प्रकाश हो या तेज आवाज इन सभी से भी दिक्कत होने लगती है।
  • सिर में अगर जोर का झटका लगे या हल्की सी चोट भी लग जाए तब भी डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। हो सकता है बाहर ज्यादा चोट न दिख रही हो लेकिन अंदर काफी गहरी चोट लगी हो। नजरअंदाज करने पर सिर्फ आंखों की रोशनी ही नहीं जाती है बल्कि व्यक्ति कोमा में भी पहुंच सकता है।
  • एक रिसर्च के अनुसार, दिमाग में बार-बार चोट लगने या ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी से डिजेनरेटिव ब्रेन डिजीज भी हो सकती है, जिसकी वजह से व्यक्ति अल्जाइमर, पार्किन्स डिजीज और डिमेंशिया से ग्रस्त हो जाता है।

 

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