ब्रेन कैंसर जल्द ही हो सकेगा उपचार संभव मछ्ली के द्वारा ; रिपोर्ट

ब्रेन कैंसर बहुत ही गंभीर बीमारी का नाम है । कई लोग इसके चलते अपनी जान गंवा चुके हैं । इस बीमारी का इलाज़ या तो ऑपरेशन है या फिर अगर यह ठीक नही हो सके तो मौत है

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जयपुर । ब्रेन कैंसर बहुत ही गंभीर बीमारी का नाम है । कई लोग इसके चलते अपनी जान गंवा चुके हैं । इस बीमारी का इलाज़ या तो ऑपरेशन है या फिर अगर यह ठीक नही हो सके तो मौत है । आज तक कुछ बीमारियाँ अभी भी ऐसी हैं जिनका इलाज़ हो पाना संभव नही हो सका । डायबिटीज़ , कैंसर और एचआईवी यह तीन बीमारियाँ ऐसी है जिनका आज तक इलाज़ हो पाना संभव नही है पर हाँ इसकी रोकथाम करने का प्रयास हमेशा रहता है जिसमें कई लोग सफल रहे हैं कई नही हो पाये हैं ।

आज हम आपको ब्रेन कैंसर से जुड़ी बहुत ही खास जानकारी देने जा रहे हैं जिसके बारे में जान कर शायद आप खुशी से उछाल पड़े  साथ ही आपको किसी अपने के जीवन की उम्मीद भी शायद नजर आ जाए । आज हम बात कर रहे हैं ब्रेन कैंसर क इलाज़ के बारे में इसका इलाज़ वैसे तो बहुत मुश्किल है । पर हाल ही में इसको ले कर एक बड़ी खबर आई है ।

हाल में इसको ले कर एक शौध किया गया है । इस शौध में पता लगा है की बहुत ही जल्द मछ्ली के द्वारा इस बीमारी का इलाज़ किया जा सकेगा । ऐसी मछलियां जिनमें जबड़े नहीं होते, उनमें एक प्रकार का रसायन पाया जाता है जिसके जरिए ब्रेन ट्यूमर में कैंसर रोधी दवाएं सीधे तौर पर पहुंचाईं जा सकती हैं। यह शोध साइंस एडवांसेज पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

शोध में पाया गया कि परजीवी सी लैम्प्रे के प्रतिरोधक तंत्र में पाए जाने वाले अणुओं को अन्य उपचारों के साथ मिलाया जा सकता है और इससे अन्य प्रकार के विकार जैसे ‘मल्टीपिल क्लिरोसिस’ अल्जाइमर और ‘आघात’ का उपचार हो सकता है। अमेरिका के मैडिसन-विस्कोन्सिन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एरिक शूस्ता कहते हैं, ‘ कई स्थितियों में इसे मूल प्रौद्योगिकी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।’ शोधकर्ताओं का कहना है कि जब दवाओं को इंजेक्शन के जरिए दिया जाता है तो कई दवाएं मस्तिष्क के लक्षित हिस्से तक पहुंच नहीं पाती क्योंकि रक्त-मस्तिष्क अवरोधक बड़े अणुओं को जाने से रोकते हैं। ब्रेन कैंसर, ट्रॉमा जैसी स्थितियों में ये अवरोधक रोग वाले क्षेत्र में छिद्रयुक्त हो जाते हैं।

 

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