मुक्केबाजी : राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में सर्विसेस का जलवा

0
74

यहां जारी एलीट पुरुष मुक्केबाजी राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में गुरुवार को सर्विसेस के आठ मुक्केबाजों ने फाइनल में जगह बना ली है।

वहीं रेलवे के सात मुक्केबाज फाइनल में पहुंचने में सफल रहे। इस बीच हालांकि उसे बड़ा झटका लगा। राष्ट्रमंडल खेलों के कांस्य पदक विजेता नमन तंवर हैवीलेट कैटेगरी में हार कर बाहर हो गए।

एसएससीबी के संजीत ने 91 किलोग्राम भारवर्ग में नमन को 3-2 से मात देकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाया।

दीपक (46 किलोग्राम भारवर्ग), पी.एल. प्रसाद (53 किलोग्राम भारवर्ग), मदन लाल (56 किलोग्राम भारवर्ग), मनीष कौशिक (60 किलोग्राम भारवर्ग), दुर्योधन सिंह नेगी (69 किलोग्राम भारवर्ग), मनजीत सिंह (75 किलोग्राम भारवर्ग) और सतीश कुमार ( 91 किलोग्राम से ज्यादा भारवर्ग) ने फाइनल में जगह बनाई है और यह सभी सर्विसेस के मुक्केबाज हैं।

इससे पहले, रेलवे के सचिन सिवाच को पी.एल. प्रसाद ने बाहर भेजा। प्रसाद ने सचिन को 5-0 से मात दी।

गौरव भिधूड़ी (56 किलोग्राम भारलवर्ग), अंकुश दहिया (60 किलोग्राम भारवर्ग), दिनेश (69 किलोग्राम भारवर्ग), प्रयाग चौहान (75 किलोग्राम भारवर्ग), मनीष पवार (81 किलोग्राम भारवर्ग), जसवीर सिंह (91 किलोग्राम से ज्यादा भारवर्ग) ने फाइनल में प्रवेश किया। यह सभी आरएसपीबी से मुक्केबाज हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleभगवान राम चुनाव जीतने में नहीं करेंगे भाजपा की मदद : फारूक अब्दुल्ला
Next articleअसम : विद्रोहियों ने 5 लोगों को मार डाला
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here