भाजपा की जीत राष्ट्रीय ताकतों की जीत : आरएसएस

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आएसएस) ने गुरुवार को लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत को राष्ट्रीय ताकतों की जीत बताया और उम्मीद जताई कि विपक्षी पार्टियां विनम्रता के साथ जनादेश को स्वीकार करेंगी।

आरएसएस महासचिव भैयाजी जोशी ने एक बयान में कहा, “भारत के करोड़ों लोग एक स्थिर सरकार पाने के लिए भाग्यशाली हैं। लोकतंत्र की जीत में अपना योगदान करने वाले प्रत्येक को बहुत सारी बधाई। विश्व के समक्ष एकबार फिर लोकतंत्र की भावना स्थापित हुई है।”

भगवा संगठन ने उम्मीद जताई कि नई सरकार आम लोगों की आकांक्षाओं और उम्मीद को पूरा करने में सफलता हासिल करेगी और विपक्षी पार्टियां विनम्रता के साथ हार को स्वीकार करेंगी।

जोशी ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सारी कड़वाहट खत्म होगी और जनादेश का विनम्रता के साथ स्वागत किया जाएगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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