BJP ने सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा पर प्रतिबंध लगाने के झारखंड सरकार के निर्णय का विरोध किया

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भाजपा झारखंड सरकार के सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा मनाने पर प्रतिबंध लगाने के फैसले से नाखुश है। राज्य सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण को फैलने के डर से यह निर्णय लिया है। राज्य सरकार के फैसले के विरुद्ध जाते हुए, रांची नगर निगम श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाटों पर पर्याप्त व्यवस्था कर रहा है।

मंगलवार को, रांची की मेयर आशा लकरा और उप मेयर संजीव विजयवर्गीय ने अन्य अधिकारियों के साथ राजधानी के विभिन्न छठ घाटों का दौरा किया। मेयर ने कहा कि घाटों को साफ कर दिया गया है और अगले 24 घंटों में घाटों से जुड़ी सड़क को साफ कर दिया जाएगा, ताकि व्रतियों को कोई समस्या न हो।

मेयर और उप मेयर दोनों भाजपा से हैं।

इसबीच रांची से भाजपा के सांसद संजय सेठ और अन्य भाजपा विधायकों ने राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन के लिए ‘जल सत्याग्रह’ किया।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा, “विधानसभा उपचुनाव के दौरान चुनाव की रैलियां हो सकती हैं। बसें पूरी क्षमता के साथ चल सकती हैं। लोग शॉपिंग मॉल जा सकते हैं। तो फिर क्यों सार्वजनिक जगहों पर छठ पूजा पर प्रतिबंध लगाया गया है।”

न्यूज स्त्रोत आइएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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