बीजेपी ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में खोला दीन दयाल उपाध्याय पुस्तकालय

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भाजपा ने दिल्ली के उत्तर पूर्वी जिले के पार्टी कार्यालय में पुस्तकालय खोला है। इस पुस्तकालय का नाम पं. दीनदयाल उपाध्याय पुस्तकालय दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता और सांसद मनोज तिवारी ने रविवार को पार्टी के इस जिला कार्यालय में बने पुस्तकालय का उद्घाटन किया। प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने इस दौरान कहा कि यहां पुस्तकों का अध्ययन कर सभी कार्यकर्ता राजनैतिक आचरण का अनुसरण कर पार्टी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। इस पुस्तकालय में एक हजार से ज्यादा किताबें रखी गई हैं। ई लाइब्रेरी की भी व्यवस्था है। कार्यकर्ता ऑनलाइन उपलब्ध मनपसंद किताबें पढ़ सकते है।

दरअसल, भाजपा अपने सभी पार्टी कार्यालयों पर पुस्तकालय की व्यवस्था कर रही है। इसी कड़ी में यमुना विहार स्थित जिला कार्यालय में रविवार को प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता व सांसद मनोज तिवारी ने पुस्तकालय का उद्घाटन किया। इस मौके पर उत्तर पूर्वी दिल्ली के जिलाध्यक्ष और घौंडा विधायक अजय महावर भी मौजूद रहे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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