प्रदेश अध्यक्ष के पदभार ग्रहण समारोह में सोशल डिस्टैंसिंग भूले बीजेपी नेता

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भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पद पर शुक्रवार को आदेश कुमार गुप्ता ने पदभार ग्रहण कर लिया। इस दौरान सोशल डिस्टैंसिंग प्रभावित हुई। फोटो खिंचाने के दौरान कई वरिष्ठ नेता एक दूसरे से सटे रहे। हालांकि पार्टी नेताओं ने कहा है कि पदभार ग्रहण समारोह के दौरान सोशल डिस्टैंसिंग का पालन हुआ। खुद प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने ट्वीट कर कार्यकर्ताओं से प्रदेश कार्यालय आने से मना किया था। जिससे कार्यकर्ता नहीं बल्कि प्रमुख पदाधिकारी ही आए।

तस्वीरों में देखा जा सकता है कि नए प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता कुर्सी पर बैठे हैं। वहीं बगल सटकर निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी खड़े हैं। मनोज तिवारी से सटकर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू तथा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन खड़े हैं। आत्मनिर्भर भारत बनाने की शपथ लेने के दौरान भी पार्टी पदाधिकारी एक दूसरे से सटे हुए नजर आए। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो गज की दूरी बनाने की अपील कर चुके हैं। उधर, पार्टी नेताओं ने बताया कि थर्मल स्कैंनिंग के बाद ही पार्टी नेताओं को कार्यालय में एंट्री मिली थी। सभी निर्देशों का पालन किया गया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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