बिहार में भाजपा नेता की गला रेतकर हत्या

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बिहार के मुंगेर जिले के लड़ैयाटांड थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता की गला रेतकर हत्या कर दी। हत्या के बाद नक्सली फरार हो गए। पुलिस द्वारा शुक्रवार को जंगली क्षेत्र से शव बरामद किया गया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सतघरवा निवासी दिनेश कोड़ा (42) का शव शुक्रवार को इलाके के जंगली क्षेत्र से बरामद किया गया। पुलिस ने बताया कि शव के पास से प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का पर्चा बरामद किया गया है। इसमें संगठन के नाम पर पैसा वसूल कर अपने पास रखना, पुलिस की मुखबिरी करना, संगठन के नाम पर जनता को धोखा देना और दबदबा पैदा करने के आरोप में हत्या करने की बात लिखी गई है।

मृतक भाजपा जिला अनुसूचित जाति एवं जनजाति मोर्चा के मुंगेर जिलाध्यक्ष थे। मुंगेर के पुलिस अधीक्षक गौरव मंगला ने बताया कि पुलिस सभी प्रकार के एंगल से पूरे मामले की जांच कर रही है। उल्लेखनीय है कि मृतक दिनेश कोड़ा इससे पहले नक्सली संगठन में शामिल था। वह बाद में समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सामाजिक तौर पर जीवनयापन कर रहा था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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