भाजपा नेता और पूर्व मंत्री ने पार्टी छोड़ी

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता उषा पुनिया ने इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बुधवार को पार्टी छोड़ दी। वह राजस्थान सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। पुनिया 2003 से 2008 तक वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में पर्यटन मंत्री रही थीं।

भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष मदनलाल सैनी को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यालय ‘मिलने-जुलने’ का अड्डा बन गया है, जबकि सभी कार्य मुख्यमंत्री कार्यालय से किए जा रहे हैं।

जाट समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पुनिया ने कहा, “जाट नेताओं को भी नजरअंदाज किया जा रहा है।”

उन्होंने पत्र में कहा, “जाट समुदाय को लगता है कि उन्हें दरकिनार कर दिया गया है और इसलिए इस पार्टी के सदस्य बने रहना मुश्किल हो गया है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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