“अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा”, 2 से 282 सीटों तक भाजपा का सफर

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जयपुर

जिन परिस्थितयों में भारतीय जनता पार्टी का निर्माण हुआ मैं उसमें नहीं जाना चाहता। देश की राजनीति को अगर नैतिक मूल्यों पर चलाने का संकल्प किसी ने किया है और जो लोग उस संकल्प को कार्य में परिणत करने की शक्ति रखते हैं वो भाजपा के मंच पर इकट्ठा हो गए। भाजपा का अध्यक्ष पद कोई अलंकार की वस्तु नहीं है। ये पद नहीं दायित्व है, प्रतिष्ठा नहीं है परीक्षा है, ये सम्मान नहीं है चुनौती है. मुझे भरोसा है कि आपके सहयोग से देश की जनता के समर्थन से मैं इस जिम्मेदारी को ठीक तरह से निभा सकूंगा।

6 अप्रैल 1980। देश में एक ऐसे राजनीतिक दल का जन्म हुआ जिसको लेकर जनता को लग रहा था कि ऐसी पार्टियां तो आती जाती रहेंगी क्योंकि तीन साल पहले ही एक जनता दल ने जन्म लिया था और तीन साल के अंदर ही उस एक दल में इतने दलों ने जन्म ले लिया कि लोगों ने मान लिया कि इंदिरा के सामने कोई नहीं, कांग्रेस के सामने कोई नहीं। उस समय हो भी तो ऐसा ही रहा था। लेकिन किसे पता था कि 2 सीट जीत कर शुरुआत करने वाली भारतीय जनता पार्टी अपने स्थापना के 35 सालों के बाद ही 540 में 282 सीट जीते लेगी और एक ऐसी गैर कांग्रेसी सरकार की स्थापना करेगी, जिसका जवाब किसी औऱ भी पार्टी के पास ना हो।

ऊपर जो कथन लिखा है वो बोल हैं, अटल बिहारी वाजपेयी के। वही वाजपेयी जो कि इस नए नवेले भारतीय जनता पार्टी के पहले अध्यक्ष थे। बाद में वो भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में बनने वाली गैर कांग्रेसी केंद्र सरकार के पहले प्रधानमंत्री भी बने।

 

भाजपा का जन्म एक तरह से 1951 में ही हो गया था। तब भाजपा के आदर्शों वाली पार्टी को जनसंघ के रूप में जाना जाता था। जनसंघ का निर्माण राष्ट्रीय सवयं सेवक संघ के साथ मिलकर किया गया था। 1967 में जनसंघ ने कई गैर कांग्रेसी पार्टियों से गठबंधन क्या और बिहार, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सरकार बना ली।

1984 चुनाव – 2 सीटें,1989 चुनाव – 85 सीटें, 1991 चुनाव – 120 सीटें, 1996 चुनाव – 161 सीटें, 1998 चुनाव – 182 सीटें, 1999 चुनाव – 182 सीटें, 2004 चुनाव – 138 सीटें, 2009 चुनाव – 116 सीटें, 2014 चुनाव – 282 सीटें

लेकिन इंदिरा गांधी के राजनीति में सक्रिय होते ही जनसंघ बाहर से कमज़ोर होता चला गया। इसे जान मिली 1977 में। 1977 में तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजंसी लागू कर दी देश भर में। कहा गया कि इंदिरा गांधी देश की दमनकारी प्रधानमंत्री हैं। चारों तरफ इंदिरा गांधी की आलोचनाएं होने लगीं। देश में फिर से इलेक्शन होने वाले थे और तब उदय हुआ जनता पार्टी का। तब जनता पार्टी ने तब लोकसभा चुनाव जीत लिया मोरारजी देसाई देश के पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बन गए। पर, ये भी संभव ना हो पाया। मात्र 3 साल के अंदर ही सरकार गिर गई और देश में फिर से आम चुनाव हुआ। इंदिरा गांधी ने वापसी की और 1980 के लोकसभा चुनाव में भारी जीत दर्जी की।

जनता पार्टी से टूटकर कई पार्टियों का निर्माण हो गया। लालू, नीतीश, मुलायम, देवगौड़ा जैसे नेता इसी जनता पार्टी की देन थे। भारतीय जनता पार्टी का निर्माण भी इसी जनता पार्टी से टूटकर हुआ था। 1980 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 2 सीटें हासिल हुई थीं। तब से लेकर अब तक भाजपा की सीटों में बढ़ोतरी ही हुई है।

भाजपा ने जो सबसे पहली सरकार बनाई थी वो थी अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 1998 में। लेकिन तब जयललिता के समर्थन वापस ले लेने के बाद फिर से लोकसभा चुनाव कराया गया क्योंकि समर्थन वापसी से वाजपेयी सरकार 13 दिनों में ही गिर गई थी। जब पुनर्मतदान हुआ तो भाजपा ने कई दलों के समर्थन के साथ राजग का निर्माण हुआ और 303 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। अटल बिहारी वाजपेयी वापस से देश की प्रधानमंत्री बने और पहली बार किसी गैरकांग्रेसी सरकार ने पूरे 5 साल पूरे किये।

साल 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को वापस से शिकस्त खानी पड़ी और इस साल कांग्रेस ने यूपीए का निर्माण किया। प्रधानमंत्री बने मनमोहन सिंह। 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पर वापस से जनता ने भरोसा किया और यूपीए की केंद्र सरकार वापस आ गई। लेकिन इन सब में देखने वाली बात यही थी कि भाजपा के अलावा और कोई पार्टी मैदान में थी ही नहीं जो कि कांग्रेस को टक्कर देती। और यही कारण था 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की अप्रत्याशित जीत। कांग्रेस के खिलाफ माहौल था और इस माहौल को भुनाने वाली एक ही पार्टी था और वो थी भाजपा। 282 सीट जीतकर भाजपा ने ये साबित कर दिया कि अगर कोई कांग्रेस को टक्कर दे सकता है तो वो है सिर्फ और सिर्फ भारतीय जनता पार्टी।

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