सट्टा बाजार में भी भाजपा जीत रही, लेकिन सीटें कम

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एक्जिट पोल के ज्यादातर नतीजों की तरह सट्टा बाजार में भी 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत बताई जा रही है, लेकिन वे एक्जिट पोल की तुलना में कुछ कम सीटें दे रहे हैं।

सात चरणों में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में कई शहरों के सट्टा बाजार भाजपा को 238 से 245 सीटें दे रहे हैं।

राजस्थान में सट्टेबाज भाजपा को 242-245 सीटें दे रहे हैं, जबकि दिल्ली के सट्टा बाजार में यह संख्या 238-241 है। करीब-करीब यही आंकड़ा मुंबई का भी है।

वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा ने 282 सीटें जीती थी, जबकि अन्य सहयोगी दलों के साथ राजग की कुल 336 सीटें थीं।

ज्यादातर एक्जिट पोल में भाजपा को अकेले बहुमत के करीब दिखाया गया है, वहीं सट्टा बाजार में यह आंकड़ा कुछ कम है। लेकिन राजग को वे पूर्ण बहुमत दे रहे हैं।

आईएएनएस-सीवोटर के एक्जिट पोल में भाजपा को 236 सीटें मिलने का अनुमान है। यह सट्टा बाजार के आकलन के करीब है।

सट्टा बाजार का मानना है कि कांग्रेस 75-82 सीटें जीत सकती है।

कई एक्जिट पोल के नतीजे बताते हैं कि राजग को 312, संप्रग को 110 और अन्य को 98 सीटें मिल सकती हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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