शिवराज सरकार के 100 दिन पर भाजपा ने वर्चुअल रैली की

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मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार के 100 दिन पूरे होने को भाजपा ने सेवा, सहयोग, सुधार और संकल्प के 100 दिन बताया है। वहीं, मुख्यमंत्री चौहान ने कमल नाथ की सरकार को ‘चार डी’ की संज्ञा दी। भाजपा ने शुक्रवार को वर्चुअल रैली का आयोजन किया। इस रैली को शिवराज, प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा, केंद्रीय मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रदेश में 15 महीनों तक कमल नाथ की चार डी सरकार थी, जिसमें दलाल, दंभ, दुर्भावना और दिग्विजय सिंह शामिल थे। यह सरकार दलालों की सरकार थी, जिन्होंने वल्लभ भवन को दलाली का अड्डा बना दिया था। प्रदेश में चारों ओर लूट मची थी। कमल नाथ सरकार में दंभ और अहंकार भरा हुआ था। कमल नाथ और दिग्विजय सिंह अहंकार से भरे थे, इनके पांव जमीन पर नहीं रहते थे। एक नेता वल्लभ भवन में बैठता था, तो दूसरा रेत, शराब और माफियागीरी में लगा रहा। 15 महीने तक चली इस सरकार ने दुर्भावना के साथ काम किया। भाजपा कार्यकर्ताओं के घर तोड़े गए, उन्हें जेल भेजा गया और उनके काम-धंधे, तबाह और बर्बाद कर दिए गए।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार अहंकार में चूर इतनी थी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें चेताया तो उल्टा उन्हें ही सड़क पर उतरने की धमकी दे दी। लेकिन कांग्रेस सरकार खुद ही सड़क पर आ गई।

प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने वर्चुअल रैली में कहा कि भाजपा का मध्यप्रदेश के विकास में बहुत बड़ा योगदान है। उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराजसिंह चौहान ने मुख्यमंत्री रहते हुए 16 वर्षो तक मध्यप्रदेश का विकास किया, लेकिन बीते 15 महीनों में मध्यप्रदेश का विकास अवरुद्ध हो गया था। एक ऐसा मुख्यमंत्री, जिन्होंने गरीबों के दर्द को नहीं समझा। ऐसे उद्योगपति मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश को 15 महीनों में तबाह और बर्बाद कर दिया था।

वर्चुअल रैली को दिल्ली से संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर ने कहा, “विकास की दृष्टि से हर मामले में शिवराज सरकार ने 15 वर्षो में प्रदेश को अग्रणी राज्यों में पहुंचाया। लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट ज्यादा मिले और कांग्रेस को सीटें, दुर्भाग्य से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। लेकिन हमने जोड़तोड़ नहीं की।”

कोरोना संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कोरोना संकट से आज पूरा विश्व प्रभावित है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता, संकल्पशक्ति और त्वरित निर्णय लेने के कारण आज देश कोरोना जैसी महामारी से दमदारी के साथ लड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन का निर्णय पूरे साहस के साथ लिया।

उन्होंने कहा कि एक तरफ वो दल है जिसने सत्ता कायम रखने के लिए देश की जनता पर आपातकाल थोपा था, वहीं दूसरी तरफ ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने कोरोना महामारी से देश की जनता की जान बचाने के लिए हाथ जोड़कर लॉकडाउन का निवेदन किया। यही फर्क भाजपा को कांग्रेस से अलग करता है।

सिंधिया ने पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ पर हमला करते हुए कहा, “आज जो पूर्व मुख्यमंत्री आरोप लगा रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि उन्होंने कोरोना संकट के समय कितने अस्पतालों का दौरा किया? वे कितने गरीबों से मिले? उन्होंने कितने दौरे किए?”

भाजपा प्रदेश सरकार के 100 दिन पूरे होने पर आयोजित वर्चुअल रैली को प्रदेश के 65 हजार बूथों पर कार्यकर्ताओं और जनता ने सुना। कार्यकर्ताओं के साथ नेता भी मौजूद रहे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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