राज्यसभा चुनाव: भाजपा के इस चाल से यूपी में विपक्षियों की नींदें हराम हो सकती हैं

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इस बार का राज्यसभा चुनाव कुछ ऐसा है कि तमाम तरह के राजनीतिक दलों के आगे के राजनीतिक समीकरण समझ में आने लगे हैं। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में। राज्यसभा का चुनाव 23 मार्च को होना है। उत्तर प्रदेश में 10 सीटों के लिए चुनाव होने हैं, जिसमें 8 सीट भाजपा और 1-1 सीट सपा और बसपा के खाते में जाना निश्चित है।

लेकिन भाजपा ने अब इस राज्यसभा चुनाव के लिए 11 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करके विपक्षी पार्टियों के पेशानी पर बल ला दिया है। यूपी में राज्यसभा का समीकरण ये है कि एक उम्मीदवार को सांसद बनने के लिए 38 विधायकों की ज़रुरत है। इस हिसाब से भाजपा के 8 और सपा के 1 सांसद का जाना राज्यसभा में तय है। 1 सीट के लिए सपा ने बसपा के समर्थन की घोषणा कर दी है। भाजपा ने बताया है कि 2 नामों की घोषणा उन्होंने सुरक्षित रखने के लिए किया है।

लेकिन सिर्फ सपा के ही समर्थन से बसपा के राज्यसभा उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर राज्यसभा जा नहीं सकते हैं। इसके लिए उन्हें कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के विधायकों के समर्थन की ज़रुरत होगी। ये दोनों दल बसपा उम्मीदवार का समर्थन करेंगे, पर भाजपा ने इसके लिए अलग से उम्मीदवारी करके बसपा के लिए मुसीबतें बढ़ा दी हैं।

राज्यसभा में दांव-पेंच का खेल खूब खेला जाता है। ऐसे में बसपा-सपा दोनों को डर हो सकता है कि उनके विधायक क्रॉस वोटिंग ना कर दें। क्योंकि एकदम करीब से ही बसपा विधायक की जीत होगी, यानि कि सारे बचे अपनी पार्टी के अलावा सपा, कांग्रेस और रालोद के विधायकों का समर्थन उन्हें चाहिये ही चाहिये।

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