बिहार : नाबालिग ने पिता, भाई पर लगाया दुष्कर्म का आरोप,प्राथमिकी दर्ज

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बिहार के किशनगंज जिले के नगर थाना क्षेत्र में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक घटना प्रकाश में आई है, जिसमें एक नाबालिग लड़की ने अपने ही पिता और भाई पर दुष्कर्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई है। पुलिस ने भी तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, नवाबगंज की रहने वाली पीड़िता का आरोप है कि उसके अपने ही घर में उसके पिता और भाई ने पहले मारपीट की और फिर उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की। नाबालिग द्वारा शोर मचाने और मां व स्थानीय लोगों के पहुंचने के बाद आरोपियों को पकड़ लिया गया और उनकी जमकर धुनाई कर दी गई।

किशनगंज के पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा ने शुक्रवार को बताया कि गुरुवार की देर शाम पीड़िता के बयान के आधार पर इस मामले की एक प्राथमिकी नगर थाने में दर्ज कर ली गई है और आरोपी पिता मोहम्मद असलम और भाई मोहम्मद राजू को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है। आरोपियों ने आरोपों को गलत बताया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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