Telangana में 9 की हत्या के दोषी बिहार के शख्स को मौत की सजा

0

तेलंगाना के वारंगल जिले की एक अदालत ने नौ प्रवासी श्रमिकों की हत्या करने के दोषी बिहार के एक शख्स संजय कुमार यादव को बुधवार को मौत की सजा सुनाई। संजय ने श्रमिकों के भोजन में नींद की गोलियां मिला दी थीं और फिर उन्हें कुएं में फेंककर मार डाला था।

इस घटना के पांच महीने बाद अदालत का फैसला आया है। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मजिस्ट्रेट ने 24 वर्षीय संजय कुमार यादव को हत्याओं का दोषी पाया और उसे मौत की सजा सुनाई।

पुलिस जांच में पता चला था कि संजय जिस युवती के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में था, उसकी हत्या कर दी थी और उस अपराध को छिपाने के लिए उसने 20 मई को वारंगल शहर के पास गोरेकुंटा गांव में श्रमिकों को कुएं में फेंककर और नौ हत्याएं कर दीं।

पुलिस ने 25 मई को संजय यादव को गिरफ्तार किया, जिसने खाने में नींद की गोलियां मिलाकर एक ही परिवार के छह सदस्यों सहित नौ लोगों की हत्या करने की बात स्वीकार की और फिर उन्हें एक-एक करके पास के कुएं में फेंक दिया।

पुलिस ने पश्चिम बंगाल के रहने वाले मोहम्मद मकसूद आलम (55), उनकी पत्नी निशा (48), उनके बेटे शाबाज आलम (20) और सोहेल आलम (18), बेटी बुशरा खातून (22), बुशरा के तीन साल के बेटे, बिहार के रहने वाले श्रीराम कुमार शाह (26), श्याम कुमार शाह (21), और त्रिपुरा के रहने वाले मोहम्मद शकील (40) का शव बरामद किया था।

संजय यादव एक गनी बैग यूनिट में काम करता था। निशा की भतीजी रफीका (37) के साथ उसके संबंध थे, जो अपने पति से अलग होने के बाद पश्चिम बंगाल से तीन बच्चों के साथ आई थी और उसी कारखाने में काम करती थी।

यादव ने किराए पर एक कमरा लिया था और उसके साथ रह रहा था। उसने जब रफीका की बेटी का यौन शोषण करने की कोशिश तो रफीका ने उसे लताड़ लगाई। इसका बदला लेने के लिए यादव ने रफीका को मार डालने की योजना बनाई।

उसने मकसूद के परिवार को सूचित किया कि वह उसे शादी के लिए अपने बड़ों से बात करने के लिए पश्चिम बंगाल ले जा रहा है। वे 6 मार्च को गरीब रथ ट्रेन से विशाखापट्टनम के लिए रवाना हुए, लेकिन यात्रा के दौरान, उसने छाछ खरीदा और उसमें नींद की गोलियां मिलाने के बाद रफीका को पीने के लिए दे दिया।

छाछ पीकर रफीका जब वह सो गई तो उसने उसका गला घोंट दिया और शव को आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले के निदादावोल के पास ट्रेन से फेंक दिया।

आरोपी राजामुंदरी में ट्रेन से उतर गया और वारंगल लौट आया। जब निशा और उसके पति ने रफीका के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह अपने गांव पहुंच गई है और बाद में वापस जा जाएगी।

जब मकसूद के परिवार ने पुलिस से शिकायत करने की धमकी दी तो उसने उन सभी को खत्म करने की योजना बनाई।

20 मई को जब मकसूद का परिवार शाबाज का जन्मदिन मना रहा था, तो वह उनके घर आया और घर पर तैयार भोजन में नींद की गोलियां मिला दीं।

जैसा कि उसी इमारत में रहने वाले दो बिहारी युवकों ने उसे मकसूद के घर पर देखा था, वह सबूत मिटाने के लिए उनके कमरे में गया और उनके खाने में भी नींद की गोलियां मिला दीं।

त्रिपुरा का मूल निवासी शकील, जो मकसूद के निमंत्रण पर मकसूद के घर आया था, वह भी संजय यादव की साजिश का शिकार बन गया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleCovid के मामले बढ़ने पर क्रोएशिया में नए नियम घोषित
Next articleआईपीएल 2020 सीएसके बनाम केकेआर पूर्वावलोकन: सुपर किंग्स कोलकाता की बढा सकता है मुश्किलें
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here