बिहार : पिता ने की बेटी की हत्या, कारण जानकर हैरान हो जाएंगे !

0
211

बिहार के औरंगाबाद जिले में एक शख्स ने अपनी दो साल की बेटी की हत्या कर दी। आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि आरोपी के भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार, पंचपोखरी गांव के बतसपुर टोला निवासी प्रमोद राम और उसकी पत्नी के बीच शुक्रवार को किसी बात को लेकर बहस चल रही थी। इस दौरान प्रमोद ने अपनी दो वर्षीय बेटी सुमन को उठा लिया और जानवरों के बांधने वाले खूंटे पर पटक दिया, जिससे घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी।

टंडवा के थाना प्रभारी साजिद हुसैन ने बताया कि पुलिस ने आरोपी पिता प्रमोद राम को गिरफ्तार कर लिया है जबकि उसके भाई सुरेश राम को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

उन्होंने कहा कि शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया और पूरे मामले की छानबीन की जा रही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleपैरा-एशियाई खेल (एथलेटिक्स) : चक्का फेंक में दीपा मलिक को कांस्य
Next articleफ़िल्मी सितारों के सबसे बड़े विवादित बयान जिन्होंने पूरी इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया था
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here