बिहार : कोरोना संक्रमितों की संख्या 9,618 हुई, अब तक 7,374 ठीक हुए

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बिहार में सोमवार को 394 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। इसके साथ राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या 9,618 तक जा पहुंची। इस बीच, 7374 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। बिहार स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले 24 घंटे में 218 लोग स्वस्थ हुए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 7,374 कोरोना संक्रमित मरीज पूर्ण स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं। फिलहाल राज्य में 2,069 सक्रिय मरीज हैं।

उन्होंने बताया कि अब तक कुल 2,12,659 नमूनों की जांच की गई है। राज्य में अब तक 63 कोरोना संक्रमितों की मौत हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमितों में अधिकांश ऐसे लोग हैं, जो तीन मई के बाद अन्य राज्यों से अपने गृह राज्य लौटे हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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