Bihar भाजपा प्रमुख ने तेजस्वी की तुलना औरंगजेब से की

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भाजपा बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने रविवार को विपक्षी नेता तेजस्वी यादव की तुलना मुगल शासक औरंगजेब से की है। यह मामला राजद के पोस्टर में पार्टी संस्थापक लालू प्रसाद सहित अन्य नेताओं की तस्वीरें गायब थीं, जिसपर संजय जायसवाल ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं।

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जयसवाल ने कहा, “स्वर्गीय रघुवंश बाबू के साथ उन्होंने जो किया, वो तो सबको याद ही होगा, लेकिन वह अपने पिता आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के साथ क्या करना चाहते हैं, यह थोड़ा शोध का विषय है। इससे तेजस्वी यादव का असली चेहरा देखने को मिलता है। वह पार्टी को लालू यादव से छीनना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा, “लालू प्रसाद के उत्तराधिकारी होने के नाते उन्हें लालू-राबड़ी शासन के ‘जंगल राज’ के कारण शर्म महसूस होती है। इसलिए, मेरा मानना है कि उन्होंने पोस्टर से अपने माता-पिता की तस्वीर हटा दी है।”

जायसवाल ने आगे कहा, “तेजस्वी का खुद अपने परिवार से घमासान चल रहा है, यह जानी हुई बात है। तेज प्रताप और मीसा का उनसे 36 का आंकड़ा चल रहा है। तेजस्वी अपनी पार्टी के अकेले नेता बन गए हैं, जिसे लोकतंत्र से चिढ़ है। वह औरंगजेब की तरह हो गए हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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