बिहार : 86 साल बाद रेलमार्ग से जुड़ेंगे मिथिलांचल के 2 हिस्से

0

वर्ष 1934 में आए भूकंप की वजह से कोसी नदी पर बना रेलपुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद यह रेलमार्ग बंद था। 86 साल बाद अब कोसी नदी पर रेलवे का पुल बनकर तैयार हो गया है, जिसके ऊपर अब जल्द ही ट्रेनें दौड़ेंगी। कोसी नदी पर बने रेलपुल से ट्रेनों का परिचालन शुरू होने का सबसे ज्यादा लाभ दरभंगा, मधुबनी, सुपौल और सहरसा जिले में रहने वालों को होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे दरभंगा से सहरसा की दूरी काफी कम हो जाएगी। पहले दरभंगा से सहरसा वाया मानसी, खगड़िया, बेगूसराय, समस्तीपुर होकर ट्रेन चलती थी। इस रूट में सहरसा से दरभंगा के बीच की दूरी 176 किलोमीटर है। नए रेलखंड का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सहरसा से दरभंगा की दूरी घटकर मात्र 125 किमी रह जाएगी।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि कोसी नदी पर बने रेलपुल का मोटर-ट्रॉली से निरीक्षण कर लिया गया है। 31 मार्च के बाद इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन शुरू हो सकता है।

उन्होंने बताया कि बिहार के सहरसा व दरभंगा के बीच कोसी पर नए पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इस पुल को सरायगढ़ से रेलवे ट्रैक के माध्यम से जोड़ दिया गया है। सकरी-निर्मली रेलखंड का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है। इसके पूरा होते ही दरभंगा-सकरी-झंझारपुर-सरायगढ़-सहरसा रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाएगा।

बिहार में वर्ष 1934 में आए भूकंप के दौरान कोसी नदी पर बना रेलपुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके साथ ही उत्तर और पूर्व बिहार के बीच का रेल संपर्क टूट गया था। बाद के दिनों में दोनों इलाकों के बीच रेल संपर्क कायम तो हुआ, लेकिन कोसी नदी पर पुल निर्माण का कार्य अटका ही रहा। वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इस दिशा में पहल की और कोसी नदी पर रेल पुल का शिलान्यास किया गया।

कुमार ने बताया कि नए कोसी पुल को सरायगढ़ की ओर से रेलवे ट्रैक से जोड़ दिया गया है। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, निर्माण बृजेश कुमार ने पहली बार मोटर ट्रली से पुल का निरीक्षण भी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि कोसी पर बने नए पुल की कुल लंबाई 1़88 किलोमीटर है और इसमें 45़7 मीटर लंबाई के ओपनवेब गर्डर वाले 39 स्पैन हैं।

उन्होंने कहा कि सहरसा-सरायगढ़-निर्मली-झंझारपुर-सकरी-दरभंगा रेलखंड उत्तर बिहार को एक नया रेलखंड मिल जाएगा। कोसी रेलपुल बनकर तैयार हो चुका है। सहरसा से सरायगढ़ तक अब ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाएगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleमोहन बागान के अध्यक्ष बने स्वप्न साधन बोस
Next articleजेजीयू के कुलपति दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर 3 सत्र में हिस्सा लेंगे
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here