भूतिया किला है महाराष्ट्र का शनिवार वाड़ा, इस समय ना जायें वरना देखकर कांप उठेगी रुह

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जयपुर। पेशवा बाजी राव की कहानी तो आप ने सुनी ही होगी। उन के जीवन पर एक बॉलीवुड फिल्म भी बन चुकी है। आज हम आप को बाजीरान के द्वारा बनाए गए शनिवार वाड़ा किले के बारे में बताने जा रहे हैं। आप की जानकारी के लिए बता दें कि शनिवार वाड़ा किला दुनिया के टॉप हॉन्टेड किलों में गिना जाता है। आज हम आप को बाजीराव पेशवा के द्वारा बनाए गए इस किले के बारे में बताने जा रहे हैं।

आप की जानकार के लिए बता दें कि शनिवार वाड़ा महल बाजीराव रोड़ पर अभिनव कला मंदिर के पास बना हुआ है। आप को बता दें कि शनिवार वाजा पेशवा राजाओं का निवास स्थान था। नीव बाजीराव प्रथम ने इस महल की नींव शनिवार के दिन 10 जनवरी 1730 में रखी थी। तथा कहा जाता है कि उस समय में इस महल को बनाने में कुल 16,110 रुपये की लागत आई थी। तथा यह महल इतना बड़ा है कि इस महल में 1 हजार से ज्यादा लोग रह सकते हैं।

आप को बता दें कि इस महल की खूबसूरती बेमिशल है। तथा देश विदेश से लोग इस महल को देखने के लिए यहां आते हैं। आप को बता दें कि इस महल की की दीवारों पर महाभारत और रामायण काल के दृश्य बने हुए हैं।

माना जाता है कि इस किले में नारायण राव, मात्र 14 साल की उम्र में मराठा साम्राज्य के 5वें पेशवा बन थे। लेकिन षड्यंत्र से उन की हत्या कर दी गई थी। जब हत्यारे नारायण राव की हत्या के लिए किले में घुसे तो नारायण राव खतरे को भांप गए तथा कक्ष से भाग गए। तथा नारायण राव पुरे महल में ‘काका माला वाचवा’ चाचा मुझे बचाओ बोलते हुए पुरे महल में दौड़ लगी दी लेकिन उन्हें बचाने के लिए कोई भी नहीं आया। इसके बाद से आज भी नारायण राव की आत्मा इस किले में भटकती है। तथा नारायण राव के द्वारा बोले गए आखिरी शब्द ‘काका माला वचाव’ को दोहराती है। यह आवाज आसपास रहने वाले लोगों को सुनाई देते है।

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