भारती इंफ्राटेल का मुनाफा 608 करोड़ रुपये

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टेलीकॉम टॉवर इंफ्रास्ट्रकचर प्रदाता भारती इंफ्राटेल ने 31 मार्च को समाप्त हुई तिमाही में साल-दर-साल आधार पर मुनाफे में मामूली वृद्धि दर्ज की है।

भारती इंफ्राटेल ने बुधवार को एक बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में उसका मुनाफा बढ़कर 608 करोड़ रुपये हो गया, जोकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 606 करोड़ रुपये था।

पूरे वित्त वर्ष में कंपनी का मुनाफा 2,494 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी के अध्यक्ष अखिल गुप्ता ने कहा, “पिछले वित्त वर्ष में भारतीय दूरसंचार उद्योग में भारी समेकन देखा गया, जब चार ऑपरेटरों ने विलय के कारण अपना परिचालन बंद कर दिया।”

कंपनी के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए दूसरा लाभांश 7.50 रुपये प्रति शेयर (10 रुपये के फेस वैल्यू पर) घोषित किया है।

गुप्ता ने कहा, “भारती इंफ्राटेल और इंडस टॉवर्स के विलय की प्रक्रिया जारी है और हम उम्मीद करते हैं कि अगले कुछ महीनों में यह पूरा हो जाएगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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