भारतपे ने सुहैल समीर को समूह अध्यक्ष नियुक्त किया

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मर्चेंट फिनटेक स्टार्ट-अप भारतपे ने गुरुवार को सुहैल समीर को समूह अध्यक्ष नियुक्त करने की घोषणा की। कंपनी ने एक बयान में कहा, “सीईओ और सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर के साथ मिलकर समीर पर संगठन, व्यापारी नेटवर्क, व्यापार और राजस्व के निर्माण की पूरी जिम्मेदारी होगी।”

इस बारे में समीर ने कहा, “समीर एक टॉप-क्लास पेशेवर ऑपरेटर हैं और चाहे व्यवसायों का निर्माण करना रहा हो या संगठनों का प्रबंधन करना रहा हो, उनके पास एक उल्लेखनीय ट्रैक रिकॉर्ड है।”

आईआईएम-लखनऊ और डीसीई के पूर्व छात्र समीर भारतपे के पहले समूह अध्यक्ष हैं। साथ ही सभी चीफ एक्सपीरियंस अधिकारी (सीएक्सओ) उन्हें रिपोर्ट करेंगे।

समीर ने आगे कहा, “भारतपे वर्तमान कोविड -19 माहौल में और भी मजबूती से उभरा है, इसकी बाजार में दोगुनी हिस्सेदारी है, जो सच में उल्लेखनीय है। मैं बेस्ट क्लास इकोनॉमिक्स के साथ केटेगरी-लीडिंग व्यवसाय बनाने के लिए भारतपे टीम और अशनीर के साथ काम करने के लिए उत्साहित हूं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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