चिरोन बेहरिंग का अधिग्रहण करेगी भारत बॉयोटेक

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भारत बायोटेक ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसने ग्लेक्सोस्मिथक्लाइन एशिया के साथ चिरोन बेहरिंग वैक्सींस के अधिग्रहण के लिए समझौता किया है, जिससे वह रेबीज टीके की दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता हो जाएगी। हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक गुजरात के अंकलेश्वर में स्थित चिरोन बेहरिंग वैक्सींस प्रा. लि. की 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी और यह सौदा पूरी तरह से नकद होगा।

भारत बॉयोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. कृषणा ईला ने यहां एक समाचार सम्मेलन में इसकी घोषणा की। उन्होंने हालांकि सौदे की रकम की जानकारी नहीं दी।

चिरोन बेहरिंग वैक्सींस दुनिया की सबसे पुरानी टीका कंपनी है, जिसकी स्थापना चिरोन कॉर्पोरेशन यूएसए ने होचेस्ट एजी का टीका कारोबार खरीद कर की थी।

चिरोन बेहरिंग वैक्सींस डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) की पूर्व योग्य निर्माता है, जो संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों को आपूर्ति की पात्र है और कंपनी के उत्पाद 37 देशों में पंजीकृत हैं।

ईला ने कहा कि चिरोंग बेहरिंग एक अलग कंपनी के रूप में काम करती रहेगी, लेकिन रेबीज टीके को एक नए ब्रांड नाम से बनाएगी। इस इकाई की क्षमता 1.5 करोड़ खुराक के निर्माण की है।

अनुमान है कि भारत में हर साल 20 लाख लोगों को कुत्ता काटता है और करीब 3.5-4 करोड़ रेबीज वैक्सिन खुराक की जरूरत हर साल होती है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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