पाकिस्तान में उठ खडे हुए भगत सिंह के समर्थक, सर्वोच्च वीरता पुरस्कार देने की मांग उठाई

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भारत की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वाले शहीद-ए-आजम भगत सिंह के समर्थकों ने एक बार फिर उनके लिए इंसाफ की मांग की है। पाकिस्तान के संगठन की ओर से मांग की गई है कि भगत सिंह को सर्वोच्च वीरता पुरस्कार ‘निशान-ए-हैदर’ मिलना चाहिए। साथ ही लाहौर के शादमान चौक पर उनकी एक प्रतिमा लगाई जानी चाहिए।

दरअसल यह मांग पाकिस्तान के शहीद भगत सिंह मैमोरियल फाउंडेशन की तरफ से रखी गई है। इस संगठन के चेयरमैन इख्तियाज राशिद कुरैशी ने इस संबंध में लाहौर के मेयर व चीफ कमिश्नर को मांगपत्र भी सौंपा है। जानकारी के लिए बता दें कि यह संगठन स्वतंत्रता के महान सेनानी भगत सिंह को कोर्ट में निर्दोष साबित करने के लिए हर संभव प्रयास करने में लगा हुआ है।

इस संबंध में इख्तियाज कुरैशी ने बताया है कि ‘लाहौर के चीफ कमिश्नर व मेयर को मांगपत्र सौंपा गया है जिसमें पाकिस्तान सरकार से मांग है कि शहीद भगत सिंह को पाकिस्तान का सर्वोच्च बहादुरी सम्मान निशान-ए-हैदर अवार्ड से नवाजा जाए। जिससे उनकी कुर्बानियों के बारे में आने वाली पीढी भी उनके बलिदान से रूबरू हो।’

इख्तियाज कुरैशी ने कहा कि “हमें पूरी उम्मीद है कि जल्द ही पाकिस्तान की अदालत में यह साबित हो जाएगा कि भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को फांसी देने का ब्रिटिश हुकूमत का फैसला गलत था क्योंकि वह बेगुनाह थे फिर भी उन्हें इस स्थान पर सूली पर चढ़ाया गया था।”

फिल्हाल, इस फाउंडेशन ने शादमान चौक का नाम भगत सिंह चौक करने की मांग पाक न्यायालय में रखी है। फाउंडेशन के मुताबिक, ‘पंजाब सरकार को इसमें और विलंब नहीं करना चाहिए। जो देश अपने नायकों को भुला देते हैं, वे धरती से गलत शब्दों की तरह मिट गए हैं।’

जाहिर है कि शहीद भगत सिंह को 23 साल की उम्र में दो अन्य स्वतंत्रता सेनानियों राजगुरु और सुखदेव के साथ 23 मार्च, 1931 को लाहौर में फांसी दी गई थी। भगत सिंह पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ षड्यंत्र रचा और ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन पी सांडर्स की हत्या की।

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